ढो रहा है आदमी कांधे पे खुद अपनी सलीब, जिंदगी का फलसफा अब बोझ ढोना हो गया

कृष्ण कांत
'ढो रहा है आदमी कांधे पे खुद अपनी सलीब
जिंदगी का फलसफा अब बोझ ढोना हो गया'.

बेटे के गर्दन की हड्डी टूटी है. चल नहीं सकता. पिता ने उसे चारपाई पर लिटाया. चारपाई को बल्ली में बांधा और लेकर देस की ओर चल पड़ा. लुधियाना से निकले थे. मध्य प्रदेश के सिंगरौली जाना था. 800 किलोमीटर का सफर तय कर लिया.

राजकुमार लुधियाना में मजदूरी करते थे. रोटी का संकट हो गया था. कोशिश की लेकिन स्थानीय प्रशासन से मदद नहीं मिली. 15 साल का बेटा चल नहीं सकता था. पिता सरकार तो है नहीं कि मरते हुए को छोड़ दे. वह तो जान जाने तक साथ देगा. पिता राजकुमार ने बेटे को लेकर परिवार सहित पैदल चलने का फैसला किया. साथ में 18 लोग थे, बारी बारी दो दो लोग चारपाई कंधे पर लेकर चल रहे थे.

शुक्रवार शाम को ये लोग कानपुर के आसपास रामादेवी हाईवे पर चल रहे थे. इस तरह चारपाई ले जाते देख किसी पुलिस अधिकारी ने पूछताछ की तो पिता रोने लगा. अधिकारी ने सभी को खाना खिलाया और वाहन की व्यवस्था करके घर भिजवाया.

अगर इन्हीं अधिकारियों को सरकारों का आदेश होता कि सबको वाहनों से घर पहुंचाया जाए तो यह काम सफलतापूर्वक हो गया होता. करोड़ों लोग अपनी जान ऐसे ही बचा रहे हैं. सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, इससे बचा जा सकता था.
(ये लेखक के निजि विचार हैं)

ढो रहा है आदमी कांधे पे खुद अपनी सलीब, जिंदगी का फलसफा अब बोझ ढोना हो गया ढो रहा है आदमी कांधे पे खुद अपनी सलीब, जिंदगी का फलसफा अब बोझ ढोना हो गया Reviewed by UPUKLive Desk on 5/17/2020 11:03:00 PM Rating: 5

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