हलाला के नामपर महिलाओं की आबरू से खेलते हैं मर्द, जानिए इस प्रथा की सच्चाई

मुहम्मद फैज़ान
तीन तलाक मुद्दे पर मुल्क में इन दिनों चर्चाएं हैं। इसी बीच एक शब्द और सामने आ रहा है ‘हलाला’। दरअसल यह एक ऐसी कुप्रथा है जो मुस्लिम समाज में लम्बे समय से देखने को मिलती है। हालांकि उलेमाओं के मतानुसार पहले से तय हलाला हराम है। हाल ही में दारूल उलूम देवबंद ने भी हलाला के खिलाफ फतवा जारी किया है। अब सवाल है कि  ‘हलाला’ के नाम पर होने वाली बेशर्मी पर क्या अब लगाम लगेगी?
 
उलेमाओं से हुई हमारी बातचीत के अनुसार यदि शौहर अपनी बीवी को तीन तलाक दे देता है तो फिर उस औरत से फिर से निकाह मुमकिन नहीं है। ये अलग बात है कि उस औरत का निकाह कहीं और हो जाए, फिर अगर वह शादी नहीं चल पाए और वहां तलाक की सूरत पैदा हो तो फिर दोबारा से पहले वाले शौहर से निकाह किया जा सकता है।

लेकिन अक्सर देखने को मिलता है कि गुस्से में आकर शौहर तीन तलाक दे देता और फिर उसे इस पर अफसोस होता है। ऐसे हालात में कथित जिम्मेदार लोग मिलकर तय करते हैं कि इस औरत का निकाह एक रात के लिए किसी और मर्द से कराया जाए और फिर सुबह को वह तलाक दे। यकीनन यह बेशर्मी और बेहयाई है। 
हाल ही में एक मामला उत्तराखंड में सामने आया जहां शौहर ने गुस्से में तीन तलाक दे दिए। उसे अफसोस हुआ तो तय किया गया कि 28 साल की युवती का निकाह हलाला 65 साल के शख्स से कराया जाए। लेकिन निकाह के बाद अधेड़ की नियत बदल गयी और उसने तलाक देने से इंकार कर दिया।
दारूर उलूम देवबंद ने जारी किया फतवा
दारुल उलूम देवबंद ने एक फतवा जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि 'अरेंज्ड' हलाला इस्लामिक नहीं है और ऐसा करने वाले लोगों को 'शर्मिंदा' होना चाहिए। हलाला के तहत, एक तलाकशुदा महिला को किसी अन्य व्यक्ति से निकाह करना पड़ता है और उसके बाद वह अपने पहले पति के पास लौटने से पहले उससे तलाक लेती है।
मोहम्मद उस्मान ने हलाला पर सवाल उठाते हुए दारुल उलूम से संपर्क किया था। जवाब में, एक पैनल ने जवाब दिया, 'तलाक के मामलों में, कुछ लोग पहले से तय करते हैं कि एक महिला को अपने पहले पति से दोबारा शादी करने के लिए एक और आदमी के साथ हलाला करवाना पड़ेगा। यह पूरी तरह गलत है और इस्लाम इस काम को पसंद नहीं करता। इस्लामी कानून के तहत यह शर्मनाक और वर्जित है।'
महिलाओं को भी इसमें तीन तलाक को लेकर समझाया गया है। फतवा में कहा गया है, 'अगर किसी महिला को तीन तलाक दिया जाता है, तो उसे अपने पूर्व पति को छोड़कर किसी भी व्यक्ति से निकाह करने का अधिकार है। अगर दूसरा पति उसे तलाक देता है, तो वह अपने पहले पति से इद्दत (घर पर एक निश्चित अवधि तक रहने) के बाद शादी कर सकती है।'
फतवा में कहा गया है कि ऐसी किसी महिला को अपने पहले पति से शादी करने के लिए हलाला करने के लिए मजबूर करना गलत है।
हलाला के नामपर महिलाओं की आबरू से खेलते हैं मर्द, जानिए इस प्रथा की सच्चाई हलाला के नामपर महिलाओं की आबरू से खेलते हैं मर्द, जानिए इस प्रथा की सच्चाई Reviewed by Unknown on 10:41 PM Rating: 5

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