क्या हमउम्र लोगों के बीच के रिश्ते के जीवन भर चलने की गारंटी होती है?

ध्रुव गुप्त 
जवानी में प्रेम करो तो विरोध। बुढ़ापे में प्रेम करो तब भी विरोध। नफ़रत करने की कोई उम्र-सीमा नहीं होती। किसी को कैसे, कब और कितने प्रेम की जरुरत है, यह सिर्फ प्रेम करने वाले को ही पता होता है। प्रेम के लिए दो लोगों के बीच उम्र का कितना फ़ासला होना चाहिए, सात साल या सैतीस साल - यह भी दो प्रेम करने वालों को ही तय करना है। 

आप बेमेल रिश्तों के अल्पकालिक होने की घोषणाएं कर सकते हैं, लेकिन क्या हमउम्र लोगों के बीच के रिश्ते के जीवन भर चलने की गारंटी होती है ? दो व्यस्क प्रेमियों की निजी ज़िंदगी, उनकी निज़ी पसंदगी-नापसंदगी और उनके साथ रहने के फ़ैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। 

जो लोग परंपराओं और संस्कृति का हवाला देकर ऐसे रिश्तों का मज़ाक उड़ाते हैं, वे वस्तुतः प्रेम से वंचित अभागे और मानसिक तौर पर बीमार लोग होते हैं।

बहुत शुभकामनाएं अनूप जलोटा जी और जसलीन ! सौ बरस की ज़िंदगी से अच्छे हैं, प्यार के दो-चार दिन !
(लेखक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, ये उनके निजी विचार हैं)
क्या हमउम्र लोगों के बीच के रिश्ते के जीवन भर चलने की गारंटी होती है? क्या हमउम्र लोगों के बीच के रिश्ते के जीवन भर चलने की गारंटी होती है? Reviewed by Unknown on 9:26 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.